06/05/2022
रो राहा है आज संविधान लोकतंत्र है लहू लुहान
गांधी आंबेडकर के ख्वाब की और भगत के इन्कलाब की झूठी कस्मे खा के बैठे है संविधान के किताब की
चल रही है झूट की दुकान
रो राहा है आज संविधान
बंद है पढाई आज कल खात्म है कमाई आज कल
अब गवा भी करना पा रहे इतनी है महंगाई आज कल
जगमगा रहे है अश्म शान लोकतंत्र है लहू लुहान
लेके सब उधार खा गये उनके दोस्त यार खा गये
भर लिया है मुठ्ठी यो मे देश सारे रोजगार खा गये
ची ख ता है आज नव जवान
रो राहा है आज संविधान
रो राहा है आज संविधान लोकतंत्र है लहू लूहान.