28/08/2026
*खिड़की पर मत बैठने दिया करो, नीचे गंदगी फैलाता है, खिड़की बंद करके रखा करो... शाम को घूमने जाओ तो नीचे कुछ न कुछ गिरा ही रहता है...*
जब भी मैं सोसाइटी में निकलती हूँ, इस तरह की शिकायतें मुझे मेरे ऑटिस्टिक बेटे आरव के लिए मिलती थीं।
मैं बस इतना बोलती - आंटी उसको इतना समझ नहीं आता है...
वो जानबूझकर नहीं करता है।
एक आंटी ने तो ये तक बोल दिया था कि खिड़की में ताला 🔒 लगा के रखा करो।
खिड़की में ताला कैसे लगा दूँ?
खिड़की पर आरव सिर्फ बैठता ही नहीं था, बाहरी दुनिया से कनेक्ट होता था... स्कूटर से जाते हुए लोग, पार्क में खेलते हुए बच्चे, पेड़, पत्तियां, चिड़ियों की आवाज, चलते हुए लोग... इन सबको वो ऑब्जर्व करता था। क्या ये कनेक्शन बंद कर दूँ मैं...?
नहीं... दूसरे ही पल मेरी अंतरात्मा ने आवाज दी... खिड़की पर बैठना आरव की फेवरेट जगह है।
पर मैंने साथ ही काम करना भी शुरू किया। जब भी आरव खिड़की के पास बैठ कर कुछ खाता तो मैं साथ में ही एक खाली प्लेट रख देती और बचा हुआ खाना उसमें रखने को बोलती... और फिर उसके बाद हाथ में प्लेट पकड़ा के डस्टबिन तक ले जाती।
पहली बार में तो उसने प्लेट भी नीचे फेंक दी थी... पर मैंने हार नहीं मानी... और हर बार यही करने को बोलती। फिर धीरे-धीरे उसे भी समझ में आने लगा कि कचरा नीचे नहीं फेंकना है... डस्टबिन में डालना है...
आज भी आरव अपनी फेवरेट जगह पर बैठता है पर अब कचरा नीचे नहीं फेंकता... क्योंकि उसे सही तरीका पता चल गया है।
ये मैं अपना एक्सपीरियंस शेयर कर रही हूँ, हो सकता है आपका बच्चा अलग तरीके से सीखे... पर सीखेगा जरूर... हार मत मानना मम्मीयों। ❤️