जनसमूह के अन्दर श्रम एवं स्वाश्रित रोजगार की महत्वता जगाने के लिए जैनाचार्य १०८ श्री विधासागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से हथकरघा एवं खादी निर्माण के प्रशिक्षण केंद्र प्रारंभ किये जाने लगे !
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खादी/ हथकरघा ही क्यों ?
१.आरोग्यवर्धक- यह कपड़ा सर्दियों में गर्म और गर्मियो में ठंडा रहता है और पसीना सोखता है ! यह कपड़ा बहुत सारे चर्म रोगों से भी शरीर को बचाता है!
२.पूर
्ण रूप से अहिंसात्मक- पॉवरलूम से बनाए जाने वाले वस्त्र की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए उसमे प्रायः कर “मटनटेलो” नामक पदार्थ का उपयोग किया जाता है! यह बैल की चर्बी एवं अन्य कुछ पदार्थो से मिलकर बनाया जाता है!
३.पर्यावरण अनुकूल-
- ९ नवम्बर २०१५ में आचार्य श्री जी के आशीर्वाद से कुछ उच्च शिक्षा प्राप्त ब्रह्मचारी युवाओ ने मिलकर मध्यप्रदेश के सागर जिले के बीना-बारह क्षेत्र में एक हथकरघा प्रशिक्षण केंद्र खोला गया ! इस प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से सभी वर्ग के २५ योग्य और जरूरतमंद व्यक्तियों को हथकरघा का प्रशिक्षण दिया गया! इस प्रशिक्षण के दौरान उनको बुनियादी व्यवस्थायें जैसे रहने, भोजन आदि कि सुविधाएं मुहैया कराई गई! और साथ ही साथ उनको अपने परिवार को सहयोग हेतु ९ हजार रू प्रतिमाह दिए गए!
लगभग छ: माह के प्रशिक्षण के पश्चात ये लोग आत्मनिर्भर हो गए! इनमे से कुछ लोगो ने अभी अपने स्थान पर प्रशिक्षण एवं उत्पादन केंद्र प्रारंभ किया है और कुछ लोग हमारी संस्था में ही बुनकर अथवा प्रशिक्षक का कार्य कर रहे है!
-बीना बारह कि तर्ज़ पर ही ९ मई २०१६ अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर आचार्य श्री जी के आशीर्वाद से महाकवि पं. भूरामल सामाजिक सहकार हथकरघा प्रशिक्षण केंद्र के नाम तले मध्यप्रदेश में एक (कुण्डलपुर जिला दमोह) और महाराष्ट्र में तीन (कुन्थलगिरी जिला....शिराद्शःपुर जिला.....सिरपुर जिला.....) केन्द्र खोले गए! इसके साथ ही एक केंद्र महिलाओ के प्रशिक्षण के लिए छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में खोला गया जहां पर ४६ जैनेतर महिलओं को स्वाश्रित रोजगार एवं श्रम की प्रेरणा दी जा रही है!
-इन सभी केन्द्रों में जैन एवं जैनेतर सभी मिलाकर कुल 450 छात्र प्रशिक्षण ले रहे है
- प्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा निर्मित वस्त्र स्थानीय लोगो की मांग पूरी करने के साथ-साथ अन्य शहरों,राज्यों व देशों में भी बेचा जायेगा ! पिछले एक दशक में जनसमूह के अन्दर प्राकृतिक उत्पादों के प्रति बहुत अधिक रूचि बढ़ी है ! इसका कारण रसायनों आदि से निर्मित उत्पादों से होने वाले भयंकर रोग या प्रकृति को हो रही हानि हो सकती है! इस बढ़ती रूचि का लाभ श्रमिकों को मिल सके इसलिए हमारे केंद्र प्रशिक्षित व्यक्तिओं को विक्रय में भी मदद करेंगे!
- आचार्य श्री जी के आशीर्वाद एवं प्रेरणा से संचालित यह सभी केंद्र हमारे देश का मूल अर्थात गावों को विकसित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है !
- हमारा लक्ष्य है की हम हथकरघा एवं खादी को भारत के गॉव गॉव तक ले जाए और जन-जन को स्वाश्रित रोजगार एवं श्रम का महत्व प्रयोगात्मक रूप से बताया जाये!