09/08/2026
क्या आजकल कांवड़ यात्रा में भक्ति के साथ competition भी बढ़ रहा है? 🕉️
20 घंटे की कांवड़, 40 घंटे की कांवड़, सबसे भारी कांवड़, सबसे ऊंची कांवड़, सबसे बड़ा DJ…
लेकिन Psychology एक interesting सवाल पूछती है:
क्या हम भगवान के लिए कर रहे हैं, या दूसरों से बेहतर दिखने के लिए?
इसे Social Comparison, Ego और Social Validation के perspective से समझिए।
ध्यान रहे—यह कांवड़ यात्रा या किसी श्रद्धालु की आलोचना नहीं है। सवाल सिर्फ इतना है कि जब comparison हमारी devotion से बड़ा हो जाए, तब क्या बदलता है?
आपकी क्या राय है? 👇
क्या भक्ति में competition आना सही है? Comment में बताइए।
ऐसी ही Psychology, Human Behavior & Mindset वाली theories के लिए
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