22/12/2022
मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला ।
घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे
बोहत तलाश किया कोई आदमी न मिला ।
तमाम रिश्तों को मैं घर पर छोड़ आई थी
फ़िर उसके बाद मुझे कोई अज़नबी न मिला ।
ख़ुदा की इतनी बड़ी कायनात में मैंने
बस एक शख़्स माँगा मुझे वही न मिला ।
बोहत अज़ीब है ये क़ुर्बतों की दूरी भी
वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला ।
✍️ बशीर बद्र