17/06/2022
धरती तेरी अंबर तेरा
धरती तेरी अंबर तेरा उठ जा रे बंदे अब हुआ सवेरा ।
रुकना तेरा काम नहीं विश्राम से होगा नाम नहीं|
तोड़ बेड़ियां आगे बढ़ जा ।
चल अब तूफानों से लड़ जा ।
सागर की गहराई में जा
मोती अमूल्य तू चुन ला ।
धरती तेरी अंबर तेरा उठ जा रे बंदे अब हुआ सवेरा|
बहा पसीना कोई कहानी गढ़ जा ।
आग को भरकर सीने में
कदमों को अपनी मंजिल का पता बता।
धरती तेरी अंबर तेरा उठ जा रे बंदे अब हुआ सवेरा|
मिट्टी का हूँ मैं, मिट्टी है मेरी ।
मिट्टी में पल कर बड़ा हुआ|
कहने को यूँ तो कुछ नहीं है मेरा ।
मानो तो सारा जहां है बसेरा ।
धरती तेरी अंबर तेरा