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Hiiii
22/01/2025

Hiiii

14/06/2023
Hi hi kaise ho dosto dua karta hoon aap sab theek honge
12/02/2023

Hi hi kaise ho dosto dua karta hoon aap sab theek honge

08/02/2023

Jay Mahakal

08/02/2023

बीरबल और मित्र का वचन
एक दिन बीरबल अपने मित्र के साथ भ्रमण के लिए निकला. दोनों बहुत दिनों बाद मिले थे. इसलिए बातचीत करते हुए न समय का पता चला, न ही दूरी का. चलते-चलते दोनों बहुत दूर निकल आये.
उनके मार्ग में एक नदी पड़ी. उन्हें नदी पार कर दूसरे छोर पर जाना था. नदी पार करने का एक ही माध्यम था. उस पर बना हुआ एक पुराना पुल.
पुल बहुत संकरा था. एक बार में केवल एक ही व्यक्ति द्वारा उसे पार किया जा सकता था. बरसात के दिन थे, तो पुल पर काई जमी हुई थी. इसलिए उसे संभलकर पार करने की आवश्यकता थी.
पहले बीरबल पुल पार करने के लिए बढ़ा और सावधानी से धीरे-धीरे चलते हुए सही-सलामत नदी के दूसरे छोर पर पहुँच गया. अब मित्र की बारी थी. वह भी पूरी सावधानी से पुल पार करने लगा. लेकिन पूरी सावधानी बरतने के बाद भी नदी के दूसरे छोर तक पहुँचने के कुछ दूर पहले उसका संतुलन बिगड़ गया और वह नदी में जा गिरा.
मित्र को नदी में गिरते देख बीरबल फुर्ती से अपना हाथ बढ़ाया और बोला, “मित्र, जल्दी से मेरा हाथ पकड़ लो. मैं तुम्हें बाहर खींच लूंगा.”
मित्र ने वैसा ही किया. उसने बीरबल का हाथ पकड़ लिया और बीरबल उसे किनारे की ओर खींचने लगा.
बीरबल पूरा ज़ोर लगाकर उसे बाहर खींच रहा था कि वह बोल पड़ा, “मेरे प्राण बचाने के लिए धन्यवाद बीरबल. मैं तुम्हें वचन देता हूँ कि इसके लिए मैं तुम्हें एक बड़ी धन राशि पुरुस्कार स्वरुप दूंगा.”
यह सुनना था कि बीरबल बे कहा, “धन्यवाद.” और मित्र का हाथ छोड़ दिया. मित्र फिर से पानी में गिर गया. लेकिन वह तब तक लगभग किनारे पहुँच चुका था. थोड़ी मशक्कत कर वह नदी के बाहर आ गया.
बाहर निकलते ही उसने बीरबल से पूछा, “क्यों? तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? मेरा हाथ अचानक छोड़ क्यों दिया?”
“अपना पुरुस्कार लेने के लिए” बीरबल तपाक से बोला.
“पुरुस्कार!!! लेकिन वह तो मैं तुम्हें नदी से बाहर निकलने के बाद देता. तुम मेरे सुरक्षित बाहर निकलने की प्रतीक्षा तो करते.” मित्र बोला.
“तुम भी मुझे पुरुस्कार देने की बात कहने के पहले पानी से बाहर आ जाने की प्रतीक्षा कर लेते मित्र.” बीरबल ने शांत भाव से उत्तर दिया.
बीरबल उसे समझाना चाहता है कि मित्र कभी भी एक-दूसरे की सहायता पुरुस्कार प्राप्त करने के लिए नहीं करते. बीरबल की बात समझकर उसके मित्र ने उससे क्षमा मांगी और उसका धन्यवाद भी किया.
सीख
मित्रता धन से बढ़कर है. उसे धन के तराजू में नहीं तौलना चाहिए.

08/02/2023

बुद्धि से भरा घड़ा
एक बार किसी बात पर अकबर बीरबल से नाराज़ हो गए और उन्होंने बीरबल को राज्य छोड़कर कहीं दूर चले जाने का आदेश दे दिया. बीरबल ने अकबर के आदेश का पालन किया और राज्य छोड़कर चले गए.

कुछ समय बीतने के बाद अकबर को बीरबल की याद आने लगी. कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बीरबल का मशवरा अकबर को निर्णय लेने में मदद करता था. इसलिए बीरबल के बिना निर्णय लेने में अकबर को असुविधा होने लगी.
आखिरकार, उन्होंने अपने सैनिकों को बीरबल को ढूंढने के लिए भेजा. सैनिकों के कई गाँव में बीरबल को ढूंढने का प्रयास किया. लेकिन बीरबल नहीं मिले. कई जगहों पर पूछताछ करने के बाद भी बीरबल का पता-ठिकाना नहीं मिल सका और अकबर के पास सैनिक बैरंग लौट आये.
अकबर किसी भी सूरत में बीरबल को वापस लाना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने एक युक्ति सोची. सैनिकों के माध्यम से उन्होंने अपने राज्य के सभी गाँवों के मुखियाओं को संदेश भिजवाया. संदेश इस प्रकार था –
‘एक माह के भीतर एक घड़े बुद्धि भरकर उस घड़े के साथ दरबार में उपस्थित हो. ऐसा न कर पाने की स्थिति में बुद्धि की जगह घड़े में हीरे-जवाहरात भरकर देना होगा.’
अकबर का ये संदेश सैनिकों द्वारा गाँव-गाँव में प्रसारित किया गया. एक गाँव में बीरबल भेष बदलकर एक किसान के खेत पर काम किया करते थे. जब उस गाँव ने मुखिया को अकबर का ये संदेश मिला, तो वो चिंतित हो उठा.
उसने गाँव के लोगों की सभा बुलाई. बीरबल भी उस सभा में उपास्थित हुआ. गाँव के मुखिया ने अकबर का संदेष गाँव वालों को दिया, तो सभी सोच में पड़ गए. तब बीरबल ने मुखिया से आग्रह किया, “महाशय! आप मुझे एक घड़ा दे दें. मैं उसे इन महीने के अंत तक उसे बुद्धि से भर दूंगा.”
मुखिया के पास और कोई चारा नहीं था. उसने एक घड़ा बीरबल को दे दिया. बीरबल वह घड़ा लेकर किसान के उस खेत पर चला गया, जहाँ वह काम किया करता था. वहाँ उसने कद्दू उगाये थे. उनमें से ही एक छोटे से कद्दू को उठाकर उसने घड़े में डाल दिया. कद्दू अब भी अपनी बेल से लगा हुआ था.

बीरबल उस कद्दू को नियमित रूप से खाद-पानी देने लगा और उसकी अच्छी तरह से देखभाल करने लगा. जिससे धीरे-धीरे कद्दू बढ़ने लगा. कुछ दिनों बाद कद्दू का आकार इतना बड़ा हो गया कि उसे घड़े से बाहर निकाल पाना असंभव था.
कुछ और दिन बीतने के बाद जब कद्दू का आकार घड़े के आकार जितना बड़ा हो गया, तब बीरबल ने उसे उसकी बेल से काटकर अलग किया. घड़े का मुँह कपड़े से ढकने के बाद वह गाँव के मुखिया के पास पहुँचा और वह घड़ा उसे देते हुए बोला, “यह घड़ा बादशाह अकबर को दे देना और उनसे कहना कि इसमें बुद्धि भरी हुई है. उसे बिना काटे और इस घड़े को बिना फोड़े उसे निकाल लीजिये.”
मुखिया बादशाह अकबर के दरबार पहुँचा और उसने अकबर को घड़ा सौंपते हुए वैसा ही कहा, जैसा बीरबल ने उसे कहने के लिए बोला था. अकबर ने जब घड़े के ऊपर से कपड़ा हटाया और उसमें झांककर देखा, तो उसमें उन्हें कद्दू दिखाई दिया. वे समझ गए कि इतनी दूर की सोच सिर्फ़ बीरबल की ही हो सकती है. पूछने पर मुखिया ने बताया कि यह उसके गाँव के एक किसान के खेत में काम करने वाले व्यक्ति ने किया है. अकबर जान चुके थे कि वो व्यक्ति और कोई नहीं बल्कि बीरबल है. वे तुरंत मुखिया के गाँव गए. वहाँ किसान के घर जाकर बीरबल से मिले और उससे माफ़ी मांगकर वापस दरबार में ले आये.

सीख- हर समस्या का कोई न कोई हल अवश्य होता है

Jay Shri Ram
08/02/2023

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