03/12/2025
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खामोश कुआँ
गाँव के बाहर एक पुराना कुआँ था।
कहा जाता था कि रात में वह बोलता है।
जो भी उसकी आवाज़ सुनता, अगली सुबह गाँव छोड़ देता… हमेशा के लिए।
सब डरते थे।
लेकिन एक दिन आरव नाम का लड़का बोला —
“अगर कुआँ सच में बोलता है, तो मैं सुनूँगा।”
आधी रात वह कुएँ के पास पहुँचा।
चारों तरफ सन्नाटा…
फिर अचानक आवाज़ आई —
“तू खुद से क्यों भाग रहा है?”
आरव चौंक गया।
आवाज़ कुएँ से नहीं,
उसके अपने दिल से आ रही थी।
उसे याद आया —
वह अपने सपनों से डरकर गाँव में छिपा बैठा था।
सुबह आरव गाँव छोड़कर गया…
कुँए की वजह से नहीं,
बल्कि अपने सपनों के पीछे जाने के लिए।
उस दिन के बाद कुआँ फिर कभी नहीं बोला।
👉 लोग आज भी कहते हैं—
कुआँ नहीं,
सच बोलता .