05/02/2025
"जीव, साक्षी को ब्रह्म जानकर तरता है" (भाग-2)
ॐ !! वंदे गुरु परंपराम् !! ॐ
हजारों बर्तन क्यों न हो, लेकिन मिट्टी से कोई स्वतंत्र नहीं है। अनेक लहरें हैं पर पानी से जुदा नहीं है। जीव अनेक है, लाखों हैं, अरबों हैं, असंख्य हैं, किन्तु, साक्षी ब्रह्म से भिन्न नहीं है। कहने में तो यह आता है कि लहरें असंख्य हैं, पर, पानी की दृष्टि से देखे, तो पानी ही है, लहरें नहीं है। अब कोई पूछे कि लहरों का भ्रम लहरों को कहाँ से हो गया ? लहरों को लहर होने का भ्रम पानी को न जानने से हुआ है। न जानना कहाँ से आया? न जानना आया नहीं; न जानना जन्म से है या अनादि है। फिर, जरा ध्यान दें। लहर को, 'हम लहर हैं, यह ख्याल कब आया होगा ? उसे पानी का अज्ञान कब हुआ होगा? लहर होने पर कि लहर होने के पहले? वह जब से लहर हुई, तभी से उसे पानी का अज्ञान है। अज्ञान और लहर एक साथ ही हुई हैं।
मैं जीव हूँ, में देह हूँ, मैं जन्मा हूँ और मैं मरूंगा; यह तो जन्म से ही है यह विचार क्यों है? क्योंकि, इसे सत्य का पता नहीं है। इस जीव को सत्य का पता नहीं है। जीव को सत्य का कब से पता नहीं है? जब से जीव है, तभी से पता नहीं है। हमें गिनती तो आती नहीं हैं. लेकिन, जब से जीव है, उसे तभी से पता नहीं है और तभी तक जीव है, जब तक पता नहीं है। जीव को जब चेतन का पता चलेगा, तो जीव की अपनी सत्ता का बाथ हो जाएगा। जीव को अपनी सत्ता लगेगी ही नहीं कि 'है'। जैसे, यदि लहर पानी को जाने, तो सत्ता किसकी है? सत्ता पानी की ही है, लहर की तो है ही नहीं। यदि लहर न जाने, तो लहर अनादि है। लहर अनादिकाल से चली आ रही है।
लहरे अनादि काल से हैं और अनादि काल से ही पानी का अज्ञान है। लहरों का आदि कभी न मिलेगा। यदि, इस लहर का आदि मिल गया, तो क्या इससे पहले लहर नहीं थी ? लेकिन, इसके पहले भी लहर थी। इसके पहले भी लहर थी और लहर अनादि है। लहर के होने का ज्ञान तो अनादि है ही; लहरों को पानी का अज्ञान भी अनादि है। जिस दिन लहर को पानी का ज्ञान होगा कि वह खुद पानी है, उस दिन से वह लहर ही नहीं है। इसलिए, यह ध्यान रखना कि अज्ञान भी पानी को नहीं हुआ। लहर को ही पानी का अज्ञान हुआ और लहर ही को यह ज्ञान है कि वह लहर है। यह लहर को ही जानना होगा कि लहर क्या है और पानी क्या है? लहर, पानी को जानकर रहेगी ही नहीं। लहर ही पानी को जानेगी और जानने पर लहर नहीं मिलेगी। क्या मिलेगा ? पानी ही मिलेगा।
अज्ञान जीव को ही है। अज्ञान तभी से है, जब से जीव है। जब तक अज्ञान है, तभी तक जीव है। जिस दिन से जीव ब्रह्म को जानेगा, उस दिन से ब्रह्म ही रहेगा; जीव नहीं रहेगा। ब्रह्म ही था; बह्म ही है और ब्रह्म ही रहेगा। जीव तो सिर्फ लगता है और तभी तक लगता है, जब तक जीव ने ब्रह्म को नहीं जाना है।
मिट्टी में घड़ा है। घड़ा, मिट्टी के अतिरिक्त कब तक है? जब तक उसे मिट्टी का बोध नहीं हुआ है। रस्सी में साँप कब से दिखता है? कहते हैं कि जब से देखा। साँप कब तक दिखेगा ? जब तक साँप देखते रहोगे। कब तक साँप देखते रहोगे ? जब तक रस्सी का ज्ञान नहीं होगा। आप कब से जीव हैं? जब से हैं, तभी से जीव हैं। कब तक जीव रहेंगे ? जब तक जीव जानते रहेंगे। कब जीव नहीं रहेंगे? जब जीव को ब्रह्म जान लेंगे। जब जीव के स्वरूप को ब्रह्म जान लेंगे, तभी जीव नहीं रहेंगे।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः !!