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💫🌹 जय सनातन हिन्दु के संस्थापक राजेश अग्रवाल की ओर से सभी को शुभ प्रभात 🌹💫🌹भरोसा खुद पर रखो तो ताकत बन जाती है और दूसरों...
07/11/2024

💫🌹 जय सनातन हिन्दु के संस्थापक राजेश अग्रवाल की ओर से सभी को शुभ प्रभात 🌹💫
🌹भरोसा खुद पर रखो तो ताकत बन जाती है और दूसरों पर रखो तो कमजोरी बन जाती है !!
🌹गौरव निष्ठा अनुशासन दिलो दिमाग के आलावा आत्मविश्वास सभी तालों की चाबी है किस किसको समझाते फिरोगे सोचने दो जो सोचना है लोग उतना ही सोचेंगे जितना उनका मानसिक विस्तार है
🌹जैसा हमारा आत्मविश्वास होता है वैसी हमारी क्षमता होती है स्वास्थ्य सबसे बड़ी दौलत है संतोष सबसे बड़ा खजाना है आत्म विश्वास सबसे बड़ा मित्र है !!
🌹जब तक पूरी बात मालूम ना हो किसी के बारे में भी अप नी कोई धारणा मत बनाओ जो दिख रहा है वो पूरा सच कहां है किसी की सुनाई बातों के पीछे आंख बंद करके मत चलो अगर तुझे लगता है के वो सच मे ही गलत है तो बताओ तुम कोन होते हो किसी के खिलाफ बोलने वाले या कोई फैसला देने वाले तुमने क्या कम गलतियां की है तुझे भी तो अनेको बार ईश्वर से क्षमा मिली है शांत रहो जुबान को अपने काबू में रखो दरार को भरने का काम करो।माफ करना सीखो माफ करो और किसी को माफी दिलवाओ,ये ही हुकम है।
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11 सितम्बर, 2024 को है राधा अष्टमी, सूद ज्योतिष से जानें व्रत पूजा, शुभ मुहूर्त सहित महत्वपूर्ण जानकारीः-राधा अष्टमी भाद...
10/09/2024

11 सितम्बर, 2024 को है राधा अष्टमी, सूद ज्योतिष से जानें व्रत पूजा, शुभ मुहूर्त सहित महत्वपूर्ण जानकारीः-

राधा अष्टमी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इन दिन श्री राधा रानी का अवतरण हुआ था। यह मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर श्री राधा रानी का ध्यान करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। उन्हें उनकी प्रिया चीजों का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से साधक को राधा रानी की कृपा प्राप्त होती है और राधा रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन विशेष रूप से बरसाना के राधा रानी मंदिर में पूजा विधिपूर्वक की जाती है। भक्त मंदिरों को सजाते हैं और राधा रानी को समर्पित चीजों का दान करते हैं।
इस साल राधाअष्टमी तिथि की शुरुआत 10 सितंबर को रात 11:11 पर शुरू होगी और 11 सितंबर को रात 11:46 पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है इसलिए 11 सितंबर 2024 को राधा अष्टमी मनाई जाएगी। इसलिए भद्रा का त्याग करके आप इसके उपरांत दोपहर में 12 बजे की राधा रानी की पूजा अर्चना करें। राधा अष्टमी पर कई शुभ योग बनने जा रहा है। इस बार राधा अष्टमी पर प्रीति योग, गजकेसरी राजयोग, बुधादित्य राजयोग, रवि योग और शश राजयोग बनेगा।

श्री राधा जी के भोग की विधिः-
1. राधा अष्टमी के दिन किशोरी जी को मालपुआ का भोग लगाएं।
2. मान्यता है कि पूजा थाली में मालपुआ शामिल करने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है और ग्रह क्लेश की समस्या से मुक्ति मिलती है।
3. श्री राधा रानी के भोग में रबड़ी और फल भी शामिल कर सकते हैं।
4. भोग-प्रसाद में तुलसी, पंचामृत, पंजीरी, खीर, हलवा, पूरी और चना भी शामिल किया जा सकता है।

राधा अष्टमी पर इन 9 बातों का रखें विशेष ध्यानः-
1. राधा अष्टमी पर ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए।
2. इस दिन देवी को घर का बना भोग प्रसाद लगाना चाहिए।
3. इस दिन वृंदावन की मंगला आरती में हिस्सा लेना शुभ माना जाता है।
4. राधा अष्टमी के दिन कठोर व्रत रखने का संकल्प अवश्य लेना चाहिए।
5. भक्त केवल सात्विक भोजन से ही अपना व्रत पूर्ण करें।
6. राधा अष्टमी को श्री राधा रानी के भजन अवश्य गाएं।
7. इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करें।
8. इस दिन किसी से भी किसी प्रकार का वाद-विवाद, किसी के बारे में बुरा बोलने से बचें और किसी का अपमान न करें।
9. राधा अष्टमी के दिन तामसिक भोजन जैसे- प्याज, लहसुन, अंडे और मांस आदि का सेवन वर्जित है।
10. राधा अष्टमी के अवसर पर राधा कृष्ण और लड्डू गोपाल जी का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक करने पर व्यक्ति को अत्यधिक पुण्य प्राप्त होता है।
11. राधा अष्टमी के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। व्रत के दौरान आप फल, मिठाई, आलू साबूदाना की सब्जी, शकरकंद और कुट्टू के आटे के पकोड़े का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा दूध और दही को फलाहार में शामिल कर सकते हैं। खाना बनाने में सेंधा नमक का प्रयोग करना चाहिए।

राधा रानी के मंत्रों का जाप करेंः-
ॐ वृषभानुज्यै विधमहे कृष्णप्रियायै धीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात ।
ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै विद्महे गान्धर्विकायै विधीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात।

श्री राधा रानी जी की आरती

आरती राधाजी की कीजै।
कृष्ण संग जो कर निवासा, कृष्ण करे जिन पर विश्वासा।
आरती वृषभानु लली की कीजै। आरती
कृष्णचन्द्र की करी सहाई, मुंह में आनि रूप दिखाई।
उस शक्ति की आरती कीजै। आरती
नंद पुत्र से प्रीति बढ़ाई, यमुना तट पर रास रचाई।
आरती रास रसाई की कीजै। आरती
प्रेम राह जिनसे बतलाई, निर्गुण भक्ति नहीं अपनाई।
आरती राधाजी की कीजै। आरती
दुनिया की जो रक्षा करती, भक्तजनों के दुख सब हरती।
आरती दु:ख हरणीजी की कीजै। आरती
दुनिया की जो जननी कहावे, निज पुत्रों की धीर बंधावे।
आरती जगत माता की कीजै। आरती
निज पुत्रों के काज संवारे, रनवीरा के कष्ट निवारे।
आरती विश्वमाता की कीजै। आरती राधाजी की कीजै ।

ज्योतिषाचार्य संदीप कुमार जी और राजेश अग्रवाल
सूद ज्योतिष
पोस्टः-10 सितम्बर, 2024
www.soodjyotish.com

10/09/2024
गणेश चतुर्थी भगवान शिव और देवी पार्वती के छोटे पुत्र गणेश जी प्रति आस्था और श्रद्धा प्रकट करने का यह सबसे अच्छा दिन है। ...
07/09/2024

गणेश चतुर्थी भगवान शिव और देवी पार्वती के छोटे पुत्र गणेश जी प्रति आस्था और श्रद्धा प्रकट करने का यह सबसे अच्छा दिन है। यह शुभ अवसर आज शनिवार, 7 सितंबर 2024 को है।

गणेश मंत्रः-
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटी सम्प्रभ।
निर्विध्नं कुरु मे देव सर्व कार्यषु सर्वदा ।।

श्लोक का अर्थः- “हे भगवान गणेश! हम आपको सर्वोच्च मानकर नमस्कार करते हैं। हे पराक्रमी भगवान! जिनके पास सूंड और शक्तिशाली शरीर के साथ पवित्र परमात्मा है, जिनकी चमक एक साथ जलते हुए एक अरब सूर्य की तरह है, जो सभी को आनंद प्रदान करते हैं। एक लाख देवताओं के भगवान की जय होय मेरी सभी समस्याओं से इस विश्वास के साथ लड़ने में मेरी मदद करें कि आप मेरी रक्षा के लिए वहां रहेंगे, जैसे आप हमेशा मेरा मार्गदर्शन करते रहे हैं। मेरे प्रभु, मुझे आप पर विश्वास है कि आप सभी बुराइयों से हमेशा के लिए सुरक्षित रहेंगे।”

चंद्र दर्शन का निषेधः-ऐसा माना जाता है कि गणेश चतुर्थी पर भक्तों को चंद्रमा नहीं देखना चाहिए। गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देखने से मिथ्या दोष होता है, जिसका अर्थ है कुछ चुराने का झूठा आरोप। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण पर भी स्यामंतक मणि चोरी करने का झूठा आरोप लगा था। भगवान कृष्ण की स्थिति जानने के बाद, ऋषि नारद ने उन्हें बताया कि उन्होंने भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा देखा है, जिससे मिथ्या दोष का श्राप होता है। ऋषि नारद ने भगवान कृष्ण को सूचित किया कि उन्हें भगवान गणेश ने मिथ्या दोष का श्राप दिया था। जो कोई भी इस दोष से शापित होगा वह समाज में कलंकित और बदनाम होगा। ऋषि नारद ने भगवान कृष्ण को मिथ्या दोष को दूर करने के लिए गणेश चतुर्थी व्रत का पालन करने का सुझाव दिया। यदि कोई गलती से भी चंद्रमा को देख ले तो निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए-

सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मारोदिस्तव हयेष स्यमंतकः॥

भगवान गणेश को प्रसन्न करने के मुख्य तरीकेः-
दूर्वा से करें पूजा- भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए गणेशोत्सव के दौरान रोजाना उन्हें दूर्वा अर्पित करें।

मोदक का भोग- मोदक भगवान गणेश को अत्यंत प्रसन्न है। इन दिनों में भगवान गणेश से विशेष आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मोदक का भोग जरूर लगाएं।

दीपक जलाएं- भगवान गणेश के समक्ष रोजाना घी का दीपक लगाएं और उनसे अपने जीवन में आ रहे अंधेरे को दूर करने की प्रार्थना करें।

सिंदुर अर्पित करें- भगवान गणेश को सिंदुर अर्पित करें। इससे जीवन में भाग्योदय होता है।

संदीप कुमार और राजेश अग्रवाल
सूद ज्योतिष
पोस्टः- 7 सितम्बर 2024
www.soodjyotish.com

कब है गणेश चतुर्थी सितम्बर, 2024 में ? जाने पूरी जानकारी सूद ज्योतिष सेः- हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल प...
05/09/2024

कब है गणेश चतुर्थी सितम्बर, 2024 में ? जाने पूरी जानकारी सूद ज्योतिष सेः-
हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से गणेश उत्सव की शुरुआत होती है. इस दिन लोग अपने घर बप्पा लेकर आते हैं और पूरे विधि विधान के साथ उनकी स्थापना शुभ मुहूर्त में करते हैं. वहीं 10 वें दिन गणपति जी का विसर्जन कर दिया जाता है.

गणेश चतुर्थी 2024 तारीख और मुहूर्तः-
इस साल शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 6 सितंबर की दोपहर 3 बजकर 1 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 7 सितंबर की शाम 5 बजकर 37 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार गणेश चतुर्थी 7 सितंबर शनिवार को मनाई जाएगी. वैसे तो बप्पा के लिए किसी मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि, वे विघ्नहर्ता हैं. लेकिन 7 सितम्बर को गणपति जी की पूजा दिन में 11 बजकर 03 मिनट से दोपहर में 1 बजकर 34 मिनट तक कर सकते हैं.

गणेश चतुर्थी पूजन विधिः-
1. गणेश चतुर्थी वाले दिन आप सूर्योदय से पहले उठ कर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं.
2. अब घर के मंदिर की साफ-सफाई कर गंगा जल से छिड़काव करें.
3. इसके बाद भगवान गणेश को प्रणाम कर तीन बार आचमन करें.
4. अब बप्पा की मूर्ति स्थापित करें. इसके बाद भगवान गणेश को जनेऊ, वस्त्र, चंदन, दूर्वा, धूप, अक्षत, दीप, पीले फूल और फल अर्पित करें.
5. पूजा करते समय भगवान गणेश को 21 दूर्वा घास जरूर अर्पित करें. दूर्वा अर्पित करते समय श्री गणेशाय नमः का जप करते रहें.
6. भगवान गणेश को लड्डूओं का भोग लगाया जाता है. इसके अलावा बप्पा को मोदक बहुत ही पसंद माने जाते हैं. पुराणों में ऐसा उल्लेख मिलता है कि गणेश जी बचपन में अपनी मां माता पार्वती के द्वारा बनाए गए मोदक पलभर में चट कर जाते थे.
7. पूजा के अंत में बप्पा की आरती करें और प्रसाद बांटें.
8. मान्यता है कि गणेश चर्तुथी के दिन की पहली रात को लोग चाँद को देखने से बचते हैं क्योंकि इसे अपशकुन माना जाता है.

गणेश चतुर्थी का इतिहासः-
गणेश को हेरम्बा, एकदंत, गणपति, विनायक और पिल्लैयार नामों से जाना जाता है. गणेश चतुर्थी को गणेश जी की पूजा देश में व्यापक रूप से मनाए जाने वाले हिंदू त्योहारों में से एक है. भगवान विनायक को भाग्य दाता और प्राकृतिक आपदाओं से बचने में सहायता करने वाले के रूप में जाना जाता है. वे यात्रा के संरक्षक देवता भी हैं. भगवान विनायक को मानव शरीर पर हाथी के सिर के साथ चित्रित किया गया है. हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार, भगवान गणेश भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र हैं.

त्यौहार के अंतिम दिन गणेश प्रतिमाओं को जल में क्यों विसर्जित किया जाता है ?
गणेश विसर्जन उत्सव के अंत का प्रतीक है और साथ ही इस तथ्य का भी कि पृथ्वी पर मौजूद हर चीज अंततः प्रकृति के एक या अधिक तत्वों में विलीन हो जाती है. यह भगवान विनायक के जन्म चक्र को भी दर्शाता है - वे मिट्टी से पैदा हुए थे और उसी रूप में तत्वों में वापस लौट जाते हैं. शाब्दिक अर्थों में, वे अपने भक्तों के साथ 7 से 10 दिनों तक रहने के बाद अपने निवास पर वापस जा रहे हैं. कुछ विद्वानों का मत है कि महाराष्ट्र के अलावा अन्य क्षेत्रों में गणेश मूर्ति का विसर्जन न करें क्योंकि महाराष्ट्र में गणेश जी अपने भाई कार्तिक के यहां से वापिस जा रहे हैं, इसलिए वहां विसर्जन कर उनकी विदाई की जाती हैं।

ज्योतिषाचार्य संदीप कुमार तथा राजेश अग्रवाल
सूद ज्योतिष
पोस्टः- 6 सितम्बर 2024
www.soodjyotish.com

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