10/09/2024
11 सितम्बर, 2024 को है राधा अष्टमी, सूद ज्योतिष से जानें व्रत पूजा, शुभ मुहूर्त सहित महत्वपूर्ण जानकारीः-
राधा अष्टमी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इन दिन श्री राधा रानी का अवतरण हुआ था। यह मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर श्री राधा रानी का ध्यान करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। उन्हें उनकी प्रिया चीजों का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से साधक को राधा रानी की कृपा प्राप्त होती है और राधा रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन विशेष रूप से बरसाना के राधा रानी मंदिर में पूजा विधिपूर्वक की जाती है। भक्त मंदिरों को सजाते हैं और राधा रानी को समर्पित चीजों का दान करते हैं।
इस साल राधाअष्टमी तिथि की शुरुआत 10 सितंबर को रात 11:11 पर शुरू होगी और 11 सितंबर को रात 11:46 पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है इसलिए 11 सितंबर 2024 को राधा अष्टमी मनाई जाएगी। इसलिए भद्रा का त्याग करके आप इसके उपरांत दोपहर में 12 बजे की राधा रानी की पूजा अर्चना करें। राधा अष्टमी पर कई शुभ योग बनने जा रहा है। इस बार राधा अष्टमी पर प्रीति योग, गजकेसरी राजयोग, बुधादित्य राजयोग, रवि योग और शश राजयोग बनेगा।
श्री राधा जी के भोग की विधिः-
1. राधा अष्टमी के दिन किशोरी जी को मालपुआ का भोग लगाएं।
2. मान्यता है कि पूजा थाली में मालपुआ शामिल करने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है और ग्रह क्लेश की समस्या से मुक्ति मिलती है।
3. श्री राधा रानी के भोग में रबड़ी और फल भी शामिल कर सकते हैं।
4. भोग-प्रसाद में तुलसी, पंचामृत, पंजीरी, खीर, हलवा, पूरी और चना भी शामिल किया जा सकता है।
राधा अष्टमी पर इन 9 बातों का रखें विशेष ध्यानः-
1. राधा अष्टमी पर ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए।
2. इस दिन देवी को घर का बना भोग प्रसाद लगाना चाहिए।
3. इस दिन वृंदावन की मंगला आरती में हिस्सा लेना शुभ माना जाता है।
4. राधा अष्टमी के दिन कठोर व्रत रखने का संकल्प अवश्य लेना चाहिए।
5. भक्त केवल सात्विक भोजन से ही अपना व्रत पूर्ण करें।
6. राधा अष्टमी को श्री राधा रानी के भजन अवश्य गाएं।
7. इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करें।
8. इस दिन किसी से भी किसी प्रकार का वाद-विवाद, किसी के बारे में बुरा बोलने से बचें और किसी का अपमान न करें।
9. राधा अष्टमी के दिन तामसिक भोजन जैसे- प्याज, लहसुन, अंडे और मांस आदि का सेवन वर्जित है।
10. राधा अष्टमी के अवसर पर राधा कृष्ण और लड्डू गोपाल जी का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक करने पर व्यक्ति को अत्यधिक पुण्य प्राप्त होता है।
11. राधा अष्टमी के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। व्रत के दौरान आप फल, मिठाई, आलू साबूदाना की सब्जी, शकरकंद और कुट्टू के आटे के पकोड़े का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा दूध और दही को फलाहार में शामिल कर सकते हैं। खाना बनाने में सेंधा नमक का प्रयोग करना चाहिए।
राधा रानी के मंत्रों का जाप करेंः-
ॐ वृषभानुज्यै विधमहे कृष्णप्रियायै धीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात ।
ॐ ह्रीं श्रीराधिकायै विद्महे गान्धर्विकायै विधीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात।
श्री राधा रानी जी की आरती
आरती राधाजी की कीजै।
कृष्ण संग जो कर निवासा, कृष्ण करे जिन पर विश्वासा।
आरती वृषभानु लली की कीजै। आरती
कृष्णचन्द्र की करी सहाई, मुंह में आनि रूप दिखाई।
उस शक्ति की आरती कीजै। आरती
नंद पुत्र से प्रीति बढ़ाई, यमुना तट पर रास रचाई।
आरती रास रसाई की कीजै। आरती
प्रेम राह जिनसे बतलाई, निर्गुण भक्ति नहीं अपनाई।
आरती राधाजी की कीजै। आरती
दुनिया की जो रक्षा करती, भक्तजनों के दुख सब हरती।
आरती दु:ख हरणीजी की कीजै। आरती
दुनिया की जो जननी कहावे, निज पुत्रों की धीर बंधावे।
आरती जगत माता की कीजै। आरती
निज पुत्रों के काज संवारे, रनवीरा के कष्ट निवारे।
आरती विश्वमाता की कीजै। आरती राधाजी की कीजै ।
ज्योतिषाचार्य संदीप कुमार जी और राजेश अग्रवाल
सूद ज्योतिष
पोस्टः-10 सितम्बर, 2024
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