#वस्त्र_सेवाभारती
"भारतीय पारंपरिक वेशभूषा अपने देश की संस्कृति की तरह विविध है"
बाजार में उपलब्ध उच्चत्तम गुणवत्ता के स्वदेशी वस्त्र एवं परिधान सामग्री "सेवाभारती" प्रस्तुत 'हर-घर योजना' के 'वस्त्र-सेवाभारती' माध्यम से सीधे आपके घर तक प्रदान करने मे सक्षम है !
@हमरी सेवाएं:-
�मास्क और PPE कीट��
�सभी प्रकार के स्वदेशी वस्त्र ��
�पुरुषों के वस्त्र��
�महिलाओं के वस्त्र��
�बच्चों वस्त्र��
�जूते, च
प्पल��
�चश्मे और घड़ी��
�कॉस्मेटिक उत्पादों��
�सौंदर्य उत्पादों��
�सभी प्रकार के पोषाक ��
�किराए पर परिधान सामग्री सेवा��
�प्रेस सेवा एवं कपड़ो की सफाई �
�कपडे डिज़ाइनर ��
�कपड़ो की सिलाई सेवा इ. ��
#अतिरिक्त_जानकारी
��मानव की भौतिक उपस्थिति के अन्य पहलुओं की तरह वस्त्रों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। वस्त्रों का व्यक्ति के व्यक्तित्व बनाने में अहम भूमिका होती है। वेशभूषा प्राचीन काल से ही समाज में विशेष भूमिका अदा करती आ रही है। जिस प्रकार राजा और उसके दरबारियों की वेशभूषा विशेष होती थी। जो लोग साधारण थे उनकी आभा साधारण होती थी। इसी प्रकार आम शिक्षा के क्षेत्र में अलग अलग स्कूलों की अलग अलग वेशभूषा होती है। आमतौर पर स्कूलों में शिक्षकों व छात्रों के लिए कठोर वेशभूषा की संहिता होती है। इससे सभी व गरीब में कोई फर्क नहीं दिखाई देता।
�जीवन का अहम हिस्सा है वस्त्र
पोशाक हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमारे बारे में नहीं बल्कि दूसरों के बारे में भी बताती है। पोशाक किसी की एक पहचान होती है। पोशाक किसी की एक पहचान होती है। पोशाक के माध्यम से हमें पता चलता है कि विद्यार्थी किस स्कूल है। पोशाक चयनित करने में शिक्षक की अहम भूमिका होती है। वह स्कूल की वर्दी सभी वर्ग को देखकर तय करता है। शिक्षा, अनुशासन और शिष्टाचार के साथ वर्दी का आइकन समाज की दशा और दिशा बदलने में सहायक होती हैं। हमें समाज के प्रबुद्ध नागरिक होने के नाते नई पीढ़ी को सभ्य समाज में आगे लाना है तो उसके लिए हमें ¨चतन करने की जरूरत है। एक सैनिक अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी उस वर्दी को नहीं छोड़ता जिसमें उसने सेवाएं दीं। विद्यालयों और कारपोरेट क्षेत्रों में वर्दी की अनिवार्यता समानता का आभास कराती है। उसी प्रकार सामान्य दिनचर्या में भी वर्दी का आइकन बरकरार रखना चाहिए।
��आत्मविश्वास बढ़ाने वाला होना चाहिए पहनावा:
अच्छे पोशाक पहनने से समाज में हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है क्योंकि इससे हमारे काम व सोच पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हम अच्छी सोच और आत्मविश्वास के कारण ही ¨जदगी के लक्ष्य को प्राप्त करते हैं। आजकल हमारा समाज हमारे बच्चों के लिए प्रतिस्पर्धा का विषय बन गया है। ऐसा लगता है कि उनकी पोशाक प्रतिदिन उनपर क्या प्रभाव डाल रही है।
�फैशन से बदल रहा समाज:
समाज में विशेषकर बच्चों में पहनावे को लेकर काफी बदलाव आ रहा है। टीवी सीरियलों और फिल्मों के साथ खेलों में प्रसिद्ध शख्सियतों की तरह दिखना चाहता है। अपनी इस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए पारिवारिक और सामाजिक स्थिति का मूल्यांकन किए बिना ही जिद कर बैठते हैं। कलाकारों और खिलाड़ियों के जैसा दिखने के चक्कर में पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी ख्याल नहीं रखते। ऐसे में हमें विशेषकर माता पिता, शिक्षक और समाज के लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है। आज के बच्चे कम कीमती कपड़ों को छोड़कर फैशन को देखते हुए महंगे कपड़ों को ज्यादा महत्व देते हैं। बच्चों में इस तरह की भावनाओं को सुधारने के लिए माता पिता, शिक्षकगण और समाज के नागरिकों को अहम भूमिका निभाना होगा।
�अभिभावकों को निभानी होगी जिम्मेदारियां:
बच्चों और युवा वर्ग में दूसरों से अच्छा और अपनी पसंद के कलाकार, खिलाड़ियों जैसे दिखने की चाह ज्यादा रहती है। टीवी और फिल्मों में दिखने वाले कलाकारों के पहनावे को देखकर आकर्षित होना स्वाभाविक है। सोशल साइट्स में बढ़ते फैशन के दौर में अभिभावकों को विशेष सावधानी सावधानी बरतने की जरूरत है। बच्चों को नैतिक शिक्षा के साथ पहनावे के प्रति भी जागरूक करने की जरूरत है। समाज में घटित हो रही आपराधिक घटनाओं के लिए कुछ हद तक हमारे बच्चों का पहनावा भी एक कारक बन रहा है। सभ्य समाज में सभ्य पोशाक भी व्यक्ति के व्यक्तित्व प्रभाव डालता है। विद्यार्थी जीवन में अध्यापक और माता पिता भगवान का रूप होता है। स्कूल पोशाक समानता का सूत्र माना जाता है। स्कूल पोशाक से न तो गरीब अमीर का भेद होता है और न ही विद्यार्थियों में हीन भावना आती है। सभ्य पहनावा न केवल एकता का प्रतीक माना जाता है बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व से दूसरों को भी प्रभावित करता है।
, �शिक्षक बनें आदर्श:
बच्चों को सभ्य वर्दी के लिए प्रेरित करना है तो शिक्षकों को भी आदर्श बनना होगा। एक शिक्षक की पहचान उसके बौद्धिक ज्ञान के साथ उसका व्यक्तित्व के साथ पहनावे के कारण समाज में अलग कराती है। शिक्षकों के पहनावे की बच्चे घर और साथियों के बीच चर्चा करते हैं। अच्छे व्यक्तित्व वाला शिक्षक होगा तो बच्चे न केवल प्रभावित होंगे बल्कि उनके जैसा बनने के लिए अनुसरण भी करेंगे। छोटे बच्चों में यह परंपरा अधिक रहती है। एक शिक्षाविद होने के नाते समाज में उसका व्यक्तित्व आदर्श बनता है। सामाजिक प्राणी होने के नाते हमारा पहनावा हमारी संस्कृति को दर्शाता है। विविधताओं में एकता और अनेकता में एकता का संदेश देने वाले इस देश की पहचान हमारा पहनावा है। अलग अलग देशों के पहनावे अलग हैं। हमारी संस्कृति, वेशभूषा, त्यौहार में पहनावे अलग अलग हैं। हमारे पहनावे की चर्चा विदेशों में होती है। पश्चिमी संस्कृति का पहनावा हमारी संस्कृति से मेल नहीं खाता। इसमें सभ्यता का अभाव देखने को मिलता है। हमें सभ्य समाज के निर्माण के लिए हमारी युवा पीढ़ी को जागरूक और आदर्श उदाहरण बनकर प्रेरित करना होगा।
��अतः वस्त्रों के महत्व को निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट किया जा सकता है
�शरीर को आवरण प्रदान करने हेतु - मनुष्य को अपने नग्न �शरीर को ढकने के लिए वस्त्र की आवश्यकता है।
�शरीर को गर्म रखने हेतु - विशेषकर ठण्ड की ऋतू में एवं ठन्डे प्रदेशों में रहने वाले व्यक्तियों को गर्म वस्त्रों की आवश्यकता होती है।
�निजी शृगार के लिये - वस्त्र न केवल आवरण प्रदान करते है वल्कि सौन्दर्य-वृद्धि में भी सहायक होती है।
�अतः शृगार के लिये भी वस्त्र धारण किए जाते है।
�सामाजिक प्रतिष्ठा हेतु - वस्त्रों द्वारा अपनी सम्पन्नता का प्रदर्शन किया जा सकता है।
�व्यक्ति अपनी आर्थिक स्थिति या समाज में अपने स्थान का प्रदर्शन वस्त्रों के माध्यम से कर सकता है।
�कार्य क्षमता में वृद्धि - अपनी कार्य क्षमता बनाये रखने के लिए यथा पानी गमी ठंडक आदि का बचाव वस्त्रों द्वारा करके अपनी कार्य क्षमता बढ़ा सकता है।
�विभिन्न प्रयोजनों हेतु - मनुष्य को शरीर के अतिरिक्त भी९ वस्त्र की आवश्यकता है। जैसे घर सजाने के लिए।
�अवगुणों को छिपाने हेतु - मानव शरीर की असामान्यता या इनमें कुछ दोष को छिपाने के लिए भी वस्त्र सहायक होती है। �शरीर का स्वाभविक तापमान कायम रखने के लिये भी वस्त्र बहुत आवश्यक है। इससे शरीर स्वस्थ रहता है।
�किसी भी आघात या बहरी जीवों के आक्रमण से सुरक्षा हेतु भी वस्त्रों की आवश्यकता होती है।
�विभागीय पहचान में वस्त्र - मनुष्य अपने कार्यक्षेत्र की पहचाना के लिए वस्त्र का उपयोग करता है पुलिस, पोस्ट मैन, पादरी चपसरसी नर्स आदि की पहचान उसके द्वारा पहने गये वस्त्र से की जा सकती है।
�अतः जैसे-जैसे सम्यता का विकास हो रहा है वैसे-वैसे वस्त्रों का महत्व बढ़ता जा रहा है। आज वस्त्रों का महत्व इतना बढ़ गया है की कहा जा सकता है - वस्त्रों से व्यक्ति से व्यक्ति बनता है।
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�वस्त्र अनुभाग
स्रोत के अनुसार कपड़े निम्न में विभाजित हैं:
प्राकृतिक फाइबर: कपास, प्राकृतिक रेशम, सनी, और ऊन
सिंथेटिक फाइबर: नायलॉन, ऐक्रेलिक, रेयान, डेक्रोन
सिंथेटिक फाइबर: पॉलिएस्टर
मिश्रित तंतुओं – आधा प्राकृतिक और आधा कृत्रिम: टेट्रॉन
कपड़े को उनकी प्रकृति के अनुसार विभाजित किया जाता है:
नरम कपड़े: इस प्रकार के कपड़े नमी शरीर पसीने को अवशोषित करते हैं, उदाहरण के लिए: सूती कपड़े, रेशम का कपड़ा, लिनन कपड़े, जॉर्जियाई कपड़े, सभी प्राकृतिक कपड़े
वाणिज्यिक कपड़े: और इस तरह के कपड़ों में बहु रंग और स्थायित्व, चमक और झुर्रियों और प्रतिरोध को प्रतिरोध किया जाता है, उदाहरण के लिए: शिफॉन कपड़े, डैक्रॉन, आशुरचना, जो कि विशुद्ध रूप से औद्योगिक वस्त्र हैं
�कपड़े का उपयोग
कपड़ों का कपड़ा परिधान उद्योग में उपयोग किया जाता है, जहां उन्हें पतलून, ब्लाउज, कपड़े, अंडरवियर और अन्य सभी आयु समूहों के अनुरूप डिजाइन किया जाता है।
कपड़े केवल मानव वस्त्र उद्योग तक ही सीमित नहीं हैं, लेकिन इसका उपयोग घर सजावट उद्योग में भी किया जाता है। वे व्यापक रूप से घर के फर्नीचर के निर्माण में उपयोग किया जाता है इन्हें विभिन्न कपड़ों से बनाया गया है: बिस्तर लिनन, कमरे में रहने वाले फर्नीचर, कमरे के पर्दे, कुर्सियाँ और बेंच बैठे हैं, कुछ कलाकृतियों को शानदार और रंगीन कपड़े से बनाया गया है।
�कपड़ों के प्रकार
,�कपास: एक नरम महसूस, कपड़े के रंग को बनाए रखने की क्षमता, और आसानी से धोने के रूप में विशेषता।
�सनी: यह मजबूत ताकत, पहनने के लिए आरामदायक, आसानी से शिकन, डाई करने के लिए आसान, शरीर नमी से छुटकारा, गर्मी के अच्छे कंडक्टर की विशेषता है।
�रेशम: यह एक नरम महसूस, महंगी, धोने के लिए आसान, घर्षण के प्रतिरोधी, आसान इस्त्री द्वारा विशेषता है, प्राकृतिक कपड़ों के बेहतरीन प्रकार में से एक है।
�ऊन: यह नरम बनावट, हल्के वजन, खरोंच प्रतिरोधी, गर्म और ठंडा इन्सुलेशन, शरीर की नमी को अवशोषित करने, पहनने के लिए आरामदायक द्वारा विशेषता है।
�मखमली: यह नरम और गर्म महसूस के साथ मोटी, धोने के लिए आसान है
�चमड़ा: यह बहुत शानदार, बहुरंगा,
�अलैथन: इसकी चमक, चमक-चमकदार चमक के साथ इसकी नरमता, शिकन-प्रतिरोधी, की विशेषता है।
�शिफॉन: यह सबसे बुनियादी प्रकार के कपड़े, मुलायम बनावट, पारदर्शी द्वारा विशेषता है।
�फीता: बाजार में इसकी उपस्थिति की विशेषता; क्योंकि यह कपड़े का सबसे अधिक बिकने वाला है, इसके रंग कई हैं
�कश्मीरी: एक गतिशील कपड़े, एक सर्दियों कपड़े माना जाता है
�Crochet: उपयोग करने में आसान सुविधाएँ, हाथ से तैयार की जाती
�ट्वीड: यह सर्दियों के कपड़े के रूप में होता है लेकिन गर्मियों के लिए हमारे साथ हो सकता है
�Tulle: एक उच्च अंत कपड़े माना जाता है, केवल लक्जरी कपड़े और शादी के कपड़े में इस्तेमाल किया।
�लाइक्रा: इसकी लचीलापन और गुणवत्ता की विशेषता है, और शरीर को पहनने पर काम करता है, और यह सबसे अधिक व्यापक कपड़ा में से एक है।
�ऐक्रेलिक: यह नरम, हल्के, लचीला और धोने योग्य सतहों की विशेषता है, पेट्रोलियम उत्पादों से बने कपड़े।
�नायलॉन: यह अपने ऊतकों की ताकत, लपट, सफाई में आसानी और इसकी कम कीमत, पेट्रोलियम उत्पादों से बना कपड़ा है।
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�वेशभूषा के अलग-अलग प्रकार व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रदर्शित करता है वह विचारों को प्रदर्शित करता है सेवाभारती भारती के माध्यम से हम इन विचारों को वह व्यक्तित्व को राह प्रदान करते हैं !��
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