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23/01/2024
नमस्कार दगडियो जै गंगा माई             दोस्तों मेने ये पेपर की कटींग फेसबुक में हमारे किसी आदरणीय चाचा की पोष्ट से उन लो...
21/07/2021

नमस्कार दगडियो
जै गंगा माई
दोस्तों मेने ये पेपर की कटींग फेसबुक में हमारे किसी आदरणीय चाचा की पोष्ट से उन लोगों के लिए काॅपी किया है जो प्रिंट मीडिया को कम पडते हैं।
वजह ये थी कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक ये खबर पहुंच सके और जिससे वे सभी कम से कम ये समझ सकें, जिनके हाथों में उत्तराखण्ड वासीयों ने अपने राज्य की बागडोर सौंपी थी दर्शल वे राज्य की जरुरतों को लेकर कितने गम्भीर निकले???

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17/07/2021

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08/04/2021

नमस्कार दोस्तो जै गंगा माई!

उत्तराखण्ड के मेरे भाईयो और बहनों ये दृश्य देखने के बाद से मन बहुत व्यतित और पिडित हो उठा है।
कोई जरा उससे जाके तो पुछे कि क्या इस इरादे से तुने चिंगारी भड़काई थी? हो सकता है ये चिंगारी सुलगाने वाला दुनियां की नजरों से बच गया हो क्या देवभूमि के निवासी हर देवी देवताओं की नजरों से भी बच गया होगा? हर बात के लिये राजनीति की कमीयां गिनाने से अच्छा इंसान की बुजदिली पर सवाल उठाना जरुरी है। मैं मानता हुं किसी के लिये मोदी जी खराब हैं तो किसी के लिये राहुल जी कोई धर्म को दोस देता है तो कोई राजनीति को, परंतु कभी भी किसी ने खुद को एक सवाल कर के देखा है कि इंसान होने के नाते मेरी क्या जिम्मेदारी बनती है??
इस से बडा दुर्भाग्य क्या हो सकता है कि जितनी आसानी से हम किसी को दोसी ठेहरा लेते हैं उससे 100 गुना ज्यादा मुश्किल से खुद की मामुली सी कमी को मानते हैं।
हरियाली और बर्फ के समय अपनी तरह तरह की तस्वीरें सोसल मीडिया पर डल कर खुद को उत्तराखण्डी होने पर गौर्वान्भित दिखाने वाले इस समय कहां चले जाते हैं जब उसी प्रकृति को इनकी जरुरत होती है?
ये प्रदेश आपका है, ये प्रकृति आप की है, यहां की सुंदरता आपकी है, इसके रहने से आपका ही गौरव बड़ता है
कृपया मेरी आप से हाथ जोड के विनती है कि अपने होने का मतलब समझिये आगे आईये प्रकृति के रक्षक बनिये! प्रदेश का सुंदर और मन मोहक माहौल बनाये रखने में अपनी भुमिका अदा करें। साथ ही जिनकी इस आग हानि पहुंची है उनके प्रति अपनी संवेदना व्यक्त कीजिये। Uttarakhand Today Dev boomi uttrakhand RJ Kaavya Mussoorie Uttrakhand City Pithoragarh Uttrakhand News

नमस्कार दोस्तो        जय गंगा माई                यह जिस किसी भी सज्जन के बिचार होंगे कडवे जरुर माने जा सकते हैं परंन्तु ...
12/08/2020

नमस्कार दोस्तो
जय गंगा माई
यह जिस किसी भी सज्जन के बिचार होंगे कडवे जरुर माने जा सकते हैं परंन्तु 100% सत्यता भी हैं । सन 2000 में राज्य के गठन से अब तक उत्तराखंड की जनता ने राज्य की बागडोर बारी बारी से दोनो ही राष्ट्रीय पार्टीयों के हाथों में दी परंतु बिकास का आलम आज भी यह है। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस आज कोई भी पार्टी ये अधिकार नहीं रखती कि उत्तराखंड की इस दसा के लिए दुसरे पर आरोप लगा सके राज्य के पिछडा रहने के लिए दोनो ही पार्टीयाँ समान रुप से जिम्मेदार हैं। आज हालात यह हैं कि आम नागरिकों को कुदाल फावडा लेकर खुद ही श्रमदान करना पड रहा है जिससे कि वे अपने गांव को मुख्य सडक से जोड सकें। जिसका उदाहरण गंगोलीहाट का डुंडा चोडा गांव है परंतु यहाँ एक बात मैं निजी तोर पर कहना चाहूंगा कि डुंडा चोडा ग्राम वासी किस्मत के धनी भी कहे जा सकते हैं जो कि मुख्य सडक से गांव की दुरी मात्र 4 किमी ही थी जिससे वे येसा करने में कामीयाब रहे बारहाल उस के लिए भी जजबे की जरुरत होती है जिसे वहां के लोगो ने बखुबी दिखाया परंतु दुसरी तरफ जिले का सीमांत गांव है क्वारबन जो कि जिला मुख्यालय से लगभग 46 तथा सडक मार्ग से 12 किमी दुर है । इस गांव को मुख्यालय से जोडने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना के अन्तर्गत 17 साल पहले 15किमी सडक बनने हेतु सर्वे किया गया था लेकिन उससे आगे का काम गांव वालों के लिए आज भी सपना बना हुवा है। थक हार कर क्वारबन के लोगों ने भी श्रम दान से सडक बनाने का निर्णय लिया जिस के लिए कुछ आर्थीक सहायता स्थानीय नेता जी से मिली बाकी गांव वालों ने चंदा एकत्रित किया परंतु 12 किमी खतरनाक पहाडी, घना जंगाल बीच में बहती गाढ जिस पर पुल को भी बनना था समंभव था कि गांव वालों का होंसला टुट गया।

21/06/2020

नमस्कार दोस्तो
जय गंगा माई....
दोस्तो आज का दिन मेरे लिए बहुत खयाली और मायूशी भरा रहा | जितना लोग मुझे Happy father's day बोलते, मैं उतना ही ज्यादा खुद से सवाल पुछता, कि क्या मैं वाकई उसी समाज से ताल्लुख रखता हूँ ? जिस के गुण गान सुन सुन कर पला बडा हुआ| घर,परिवार, रिस्ते- नाते अपनी संस्कृति की तो बात ही निराली हुआ करती थी. हम हर पल प्यार, दुलार और मंमता की छाया में फलते फुलते हैं, र्दशल ये कहानी मां सुनाया करती, और र्गव से सीन चौडा हमारा हुआ करता था. ना जाने आज कहा गयी गई वो भावनाये? वो ईन्सानियत, वो अपनापन!!
हम कब और कैसे ईतने बदल गये आखिर हमारी क्या येसी मजबुरी बन गयी कि जिन को हर पल दिल में होना चाहिए उनको याद करने के लिये हमे साल में एक दिन नीरधारित करना पड रहा है? ना जाने येसे ही कितने सवाल रह रह के मन को झकझोड रहे थे. मन में यही कशमकश लिऐ सारा दिन मायुश था.
ईसलिये के आगे मैं बस यही कहना चाहुंगा दोस्तो- संवेदनसील बनीये अपनो के बीच कुछ वक्त गुजारिये. साल में एक दिन मां बाप की तस्बीर सोसल मीडीया में डाल कर नीचे चंद लाईने लिख देने से ये ना मान बैठिये कि आप की जवापदारी खत्म हो गयी. आप दुनिया के लिऐ नही दुनीया आप के लीऐ है| अपनी खुशियो को पेहचानिये. अनावस्यक जमा करने के लालच में उन पलो को हाथ से ना जाने दें जो सिर्फ आप के लिऐ बने थे. ना र्सिफ अपनी खुशी परिवार के संग बांटिये, बल्कि उनकी खुशीयो में भी सामिल होईये. किसी साधारण दिन में अपने मां - बाप के संग खीची गई तस्वीर को सोसल मीडीया में सेयर कर के देखियेगा मेरा वादा है आप से आज के दिन सेयर की गयी तस्वीर से ज्यादा लाईक और कमेन्ट मीलेंगे.

अन्त में मैं अपने उन सभी दोस्तो से कहना चाहता हुं जिनहोने मुझे फार्दस डे विस किया और मैं उनका उत्तर नही दे सका, माप कीजीएग आप की बनावटी परंमपरा को मानने के लिए मेरा मन गवाही नही देता.

21/05/2020

हंसा कर तू भी ऐ साथी,
खुशियों की गठरी अभी टकी है,
यूँ न ले गमो का सहारा
अभी तो जिन्दगी बाकी है

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