21/06/2020
नमस्कार दोस्तो
जय गंगा माई....
दोस्तो आज का दिन मेरे लिए बहुत खयाली और मायूशी भरा रहा | जितना लोग मुझे Happy father's day बोलते, मैं उतना ही ज्यादा खुद से सवाल पुछता, कि क्या मैं वाकई उसी समाज से ताल्लुख रखता हूँ ? जिस के गुण गान सुन सुन कर पला बडा हुआ| घर,परिवार, रिस्ते- नाते अपनी संस्कृति की तो बात ही निराली हुआ करती थी. हम हर पल प्यार, दुलार और मंमता की छाया में फलते फुलते हैं, र्दशल ये कहानी मां सुनाया करती, और र्गव से सीन चौडा हमारा हुआ करता था. ना जाने आज कहा गयी गई वो भावनाये? वो ईन्सानियत, वो अपनापन!!
हम कब और कैसे ईतने बदल गये आखिर हमारी क्या येसी मजबुरी बन गयी कि जिन को हर पल दिल में होना चाहिए उनको याद करने के लिये हमे साल में एक दिन नीरधारित करना पड रहा है? ना जाने येसे ही कितने सवाल रह रह के मन को झकझोड रहे थे. मन में यही कशमकश लिऐ सारा दिन मायुश था.
ईसलिये के आगे मैं बस यही कहना चाहुंगा दोस्तो- संवेदनसील बनीये अपनो के बीच कुछ वक्त गुजारिये. साल में एक दिन मां बाप की तस्बीर सोसल मीडीया में डाल कर नीचे चंद लाईने लिख देने से ये ना मान बैठिये कि आप की जवापदारी खत्म हो गयी. आप दुनिया के लिऐ नही दुनीया आप के लीऐ है| अपनी खुशियो को पेहचानिये. अनावस्यक जमा करने के लालच में उन पलो को हाथ से ना जाने दें जो सिर्फ आप के लिऐ बने थे. ना र्सिफ अपनी खुशी परिवार के संग बांटिये, बल्कि उनकी खुशीयो में भी सामिल होईये. किसी साधारण दिन में अपने मां - बाप के संग खीची गई तस्वीर को सोसल मीडीया में सेयर कर के देखियेगा मेरा वादा है आप से आज के दिन सेयर की गयी तस्वीर से ज्यादा लाईक और कमेन्ट मीलेंगे.
अन्त में मैं अपने उन सभी दोस्तो से कहना चाहता हुं जिनहोने मुझे फार्दस डे विस किया और मैं उनका उत्तर नही दे सका, माप कीजीएग आप की बनावटी परंमपरा को मानने के लिए मेरा मन गवाही नही देता.