Pushti Saaj Shringar

Pushti Saaj Shringar The Ultimate Solution to Customise SAAJ Making

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी Thursday, 18 June 2026श्वेत मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर श्वेत ...
18/06/2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी
Thursday, 18 June 2026

श्वेत मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर श्वेत मोर चंद्रिका के श्रृंगार

ऊष्णकाल का तृतीय अभ्यंग

राजभोग दर्शन –

साज – (राग : सारंग)

आवत ही यमुना भर पानी l
श्याम रूप काहुको ढोटा वाकी चितवन मेरी गैल भुलानी ll 1 ll
मोहन कह्यो तुमको या व्रजमें हमे नहीं पहचानी l
ठगी सी रही चेटकसो लाग्यो तब व्याकुल मुख फूरत न बानी ll 2 ll
जा दिनतें चितये री मो तन तादिनतें हरि हाथ बिकानी l
'नंददास' प्रभु यों मन मिलियो ज्यों सागरमें सरित समानी ll 3 ll

साज - आज श्रीजी में सफ़ेद रंग के मलमल पर कमल के चित्रांकन से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को श्वेत रंग की मलमल का पिछोड़ा धराया जाता है.

श्रृंगार – आज श्रीजी को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का छेड़ान का श्रृंगार धराया जाता है.
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर श्वेत छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, श्वेत मोर चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं.
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं एवं इसी प्रकार की एक व एक कमल माला हमेल की भांति धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चाँदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का एवं गोटी हक़ीक की आते हैं.

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल तृतियाWednesday, 17 June 2026 शरबती मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चं...
17/06/2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल तृतिया
Wednesday, 17 June 2026

शरबती मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चंद्रिका के श्रृंगार

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

आज धरी गिरधर पिय धोती
अति झीनी अरगजा भीनी पीतांबर घन दामिनी जोती ll 1 ll
टेढ़ी पाग भृकुटी छबि राजत श्याम अंग अद्भुत छबि छाई l
मुक्तामाल फूली वनराई, 'परमानंद' प्रभु सब सुखदाई ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में शरबती रंग की मलमल की, रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है.
गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को शरबती रंग की मलमल पर रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित धोती एवं राजशाही पटका धराया जाता है.

श्रृंगार – आज श्रीजी को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है.
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर शरबती रंग के ग्वाल पगा पर मोती की लड़, पगा चंद्रिका (मोरशिखा) क़तरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.
श्रीकर्ण में मोती के लोलकबिंदी धराये जाते हैं.
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, झीनें लहरियाँ के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का व गोटी बाघ बकरी की आती है.

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया (प्रतिपदा क्षय)Tuesday, 16 June 2026बादली मलमल का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर गोल लटप...
16/06/2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया (प्रतिपदा क्षय)
Tuesday, 16 June 2026

बादली मलमल का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर गोल लटपटी पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

पनिया न जैहोरी आली नंदनंदन मेरी मटुकी झटकिके पटकी l
ठीक दुपहरीमें अटकी कुंजनमें कोऊ न जाने मेरे घटकी ll 1 ll
कहारी करो कछु बस नहि मेरो नागर नटसों अटकी l
‘नंददास’ प्रभुकी छबि निरखत सुधि न रही पनघटकी ll 2 ll

साज - आज श्रीनाथजी में बादली मलमल की पिछवाई धरायी जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को बादली मलमल का आड़बंद धराया जाता है.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन श्रृंगार धराया जाता है. मोती के आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर बादली गोल लटपटी पाग के ऊपर सिरपैंच, गोल चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
श्वेत पुष्पों की सुन्दर थागवाली दो कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, झीने लहरिया के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल व गोटी हकीक के आते है.

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्याMonday, 15 June 2026छप्पनभोग (बड़ा) मनोरथअधिक ज्येष्ठ मास के अंतिम दिन आज श्रीनाथजी...
15/06/2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या
Monday, 15 June 2026

छप्पनभोग (बड़ा) मनोरथ

अधिक ज्येष्ठ मास के अंतिम दिन आज श्रीनाथजी में किन्हीं वैष्णव द्वारा आयोजित छप्पनभोग का मनोरथ होगा.
नियम (घर) का छप्पनभोग वर्ष में केवल एक बार मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा को ही होता है. इसके अतिरिक्त विभिन्न खाली दिनों में वैष्णवों के अनुरोध पर श्री तिलकायत महाराज की आज्ञानुसार मनोरथी द्वारा छप्पनभोग मनोरथ आयोजित होते हैं.
इस प्रकार के मनोरथ सभी वैष्णव मंदिरों एवं हवेलियों में होते हैं जिन्हें सामान्यतया ‘बड़ा मनोरथ’ कहा जाता है.

बड़ा मनोरथ के भाव से श्रीजी मंदिर के सभी मुख्य द्वारों की देहरी को हल्दी से लीपी जाती हैं एवं आशापाल की वंदनमाल बाँधी जाती हैं.

आज दो (राजभोग व संध्या आरती) समय की आरती थाली की आती हैं.

मणिकोठा, डोल-तिबारी, रतनचौक आदि में छप्पनभोग के भोग साजे जाते हैं अतः श्रीजी में मंगला के पश्चात सीधे राजभोग अथवा छप्पनभोग (भोग सरे पश्चात) के दर्शन ही खुलते हैं.

छप्पन भोग के भाव से श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से दूधघर में सिद्ध की गयी केसर युक्त बासोंदी की हांडी व शाकघर में सिद्ध चार विविध प्रकार के फलों के मीठा अरोगाये जाते हैं.
राजभोग की अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता एवं सखड़ी में मीठी सेव, केसरयुक्त पेठा व पाँच-भात (मेवा-भात, दही-भात, राई-भात, श्रीखंड-भात, वड़ी-भात) अरोगाये जाते हैं.

छप्पनभोग दर्शन में प्रभु सम्मुख 25 बीड़ा सिकोरी (सोने का जालीदार पात्र) में रखे जाते है.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

मदन गोपाल गोवर्धन पूजत l
बाजत ताल मृदंग शंखध्वनि मधुर मधुर मुरली कल कूजत ll 1 ll
कुंकुम तिलक लिलाट दिये नव वसन साज आई गोपीजन l
आसपास सुन्दरी कनक तन मध्य गोपाल बने मरकत मन ll 2 ll
आनंद मगन ग्वाल सब डोलत ही ही घुमरि धौरी बुलावत l
राते पीरे बने टिपारे मोहन अपनी धेनु खिलावत ll 3 ll
छिरकत हरद दूध दधि अक्षत देत असीस सकल लागत पग l
‘कुंभनदास’ प्रभु गोवर्धनधर गोकुल करो पिय राज अखिल युग ll 4 ll

साज – श्रीजी में आज छप्पनभोग के भाव की गौमाता वाली, किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की है.

वस्त्र – आज प्रभु को चंदनी मलमल का छाप वाला पिछोड़ा धराया है.

श्रृंगार – आज श्रीजी को वनमाला का (चरणारविन्द तक) हल्का श्रृंगार धराया है. मोती के सर्व आभरण धराये हैं.
श्रीमस्तक पर मोती के टिपारा के ऊपर घेरा व गौकर्ण धराये हैं. श्रीकर्ण में कुंडल धराये हैं.
पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, सूवा के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये हैं.
पट लाल व गोटी बाघ बकरी की है.

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशीSunday, 14 June 2026गुलाबी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर मोती का किरीट के श...
14/06/2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी
Sunday, 14 June 2026

गुलाबी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर मोती का किरीट के श्रृंगार

श्रीजी में
प्रातः - मोती का बंगला का मनोरथ
प्रियाजी में
प्रातः - हटड़ी का मनोरथ

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

आज ठाड़े लाल मुकुट धरे l
वदन लसत मकराकृत कुंडल रतिपति मन जु हरे ll 1 ll
अरुन अधर और चिबुक चारु बन्यो दुलरी मोहन माल गरे l
अति सुगंध और चंदन खोर किये पहोंची मोतीन की लरे ll 2 ll
कर मुरली कटि लाल काछनी किंकणी नूपुर शब्द करे l
गुन भरे ‘कृष्णदास’ प्रभु राधा निरख नेन ईत ऊत न टरे ll 3 ll

साज - आज श्रीजी में गुलाबी जालीदार पिछवाई धरायी है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की है.

वस्त्र – श्रीजी को आज गुलाबी मलमल का पिछोड़ा धराया है.

श्रृंगार – आज प्रभु को वनमाला के (चरणारविन्द तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया है. मोती के सर्व आभरण धराये हैं.
श्रीमस्तक पर मोती का किरीट पान धराया है.
श्रीकर्ण में मोती के कुंडल धराये हैं. कली आदि की माला धराई है. पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी भी धरायी हैं. श्रीहस्त में कमलछड़ी, चांदी के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये हैं.
पट गोटी ऊष्णकाल के राग-रंग के हैं.

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी Saturday, 13 June 2026मल्लकाछ टिपारा का श्रृंगारश्रीजी मेंप्रातः - जय गोपाल ...
13/06/2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी
Saturday, 13 June 2026

मल्लकाछ टिपारा का श्रृंगार

श्रीजी में
प्रातः - जय गोपाल (कुंडवारा) मनोरथ
प्रियाजी में
प्रातः - फल और फूल का बंगला / सघन कुंज का मनोरथ

कीर्तन – (राग : सारंग)

गोविंद लाडिलो लडबोरा l
अपने रंग फिरत गोकुलमें श्यामवरण जैसे भोंरा ll 1 ll
किंकणी कणित चारू चल कुंडल तन चंदन की खोरा l
नृत्यत गावत वसन फिरावत हाथ फूलन के झोरा ll 2 ll
माथे कनक वरण को टिपारो ओढ़े पिछोरा l
‘परमानंद’ दास को जीवन संग दिठो नागोरा ll 3 ll

साज - आज श्रीजी में भूल-भुलैया के भाव के चित्रांकन की पिछवाई धरायी है.
गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की है.

वस्त्र – श्रीजी को आज बसरा के मोती का मल्लकाछ एवं पटका धराया जाता है.

श्रृंगार – आज प्रभु को श्रीकंठ का शृंगार छेड़ान (हल्का) बाक़ी मध्य का (घुटने तक) ऊष्णक़ालीन श्रृंगार धराया जाता है. मोतियों के सर्व आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर टिपारा का साज (बसरा के मोती की टिपारा की टोपी के ऊपर मध्य में मोती की मोरशिखा और दोनों ओर दोहरा कतरा) तथा बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मयुराकृति कुंडल धराये जाते हैं.
हांस, त्रवल, पायल कड़ा हस्तसाखलाआदि धराये जाते हैं. श्रीकंठ में श्वेत माला धरायी जाती है. श्वेत पुष्पों की विविध पुष्पों की थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.
श्रीहस्त में कमल के फूल की छड़ी, सुवा के वेणुजी तथा दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट उष्णकाल का व गोटी हक़ीक की आती है.

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशीFriday, 12 June 2026गुलाबी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर दुमाला पर सेहरा के श्रृ...
12/06/2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी
Friday, 12 June 2026

गुलाबी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर दुमाला पर सेहरा के श्रृंगार

आज के मनोरथ

राजभोग में गंगा जमुना का बंगला
शाम को सावन भादो का मनोरथ

दिन दुल्हे तेरे सोहे शीश सुहावनो ।
मणि मोतिन को शेहरो सोहे बसियो मन मेरे ।।१।।
मुख पून्यो को चंद है मुक्ताहल तारे ।
उन के नयन चकोर हैं, ऐ सब देखन हारे ।।२।।
पिय बने प्यारि, अति सुंदर बनि आय ।
परम आगरी रूप नागरी ऐ सब देखन आई ।।३।।
दुलहनि रेन सुहाग की, दुलह सुंदर वर पायो ।
श्रीनंदलाल को शेहरो, जन परमानंद यश गायो ।।४।।

राजभोग दर्शन – (राग : सारंग)

आज बने गिरिधारी दुल्हे चंदनको तनलेप कीये l
सकल श्रृंगार बने मोतिन के विविध कुसुम की माल हिये ll 1 ll
खासाको कटि बन्यो है पिछोरा मोतिन सहरो सीस धरे l
रातै नैन बंक अनियारे चंचल अंजन मान हरे ll 2 ll
ठाडे कमल फिरावत गावत कुंडल श्रमकन बिंद परे l
‘सूरदास’ प्रभु मदन मोहन मिल राधासों रति केल करे ll 3 ll

साज – आज श्रीजी में सेहरा का श्रृंगार धराये श्री स्वामिनीजी, श्री यमुनाजी एवं मंगलगान करती व्रजगोपियों के सुन्दर चित्रांकन से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को गुलाबी मलमल का पिछोड़ा धराया गया है.

श्रृंगार – प्रभु को आज मध्य से दो अंगुल नीचे (घुटने तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया गया है. मोती के के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर गुलाबी रंग के दुमाला के ऊपर मोती का सेहरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये हैं. दायीं ओर सेहरे की मोती की चोटी धरायी गयी है. श्रीकर्ण में मोती के मयूराकृति कुंडल धराये हैं.
श्रीकंठ में कली आदि सब माला धरायी जाती है. आज हांस-त्रवल नहीं धराये जाते.
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में दो कमल की कमलछड़ी, जड़ाव मोती के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का, गोटी राग-रंग की, आरसी श्रृंगार में पीले खंड की व राजभोग में सोने की डांडी की आती है.

व्रज -विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण एकादशीThursday, 11 June 2026चंदनी मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर चिनमा पगा पर तुर्...
11/06/2026

व्रज -विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी
Thursday, 11 June 2026

चंदनी मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर चिनमा पगा पर तुर्रा के श्रृंगार

श्रीजी में
प्रातः - चाँदी का बंगला
शाम को - आवत मोहन धेनु लिए
प्रियाजी में
प्रातः - बिराजत सघन कुंज की ओट
शाम को - गोरवर्धन ते आई गाय सब

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

भलेई मेरे आये हो पिय
भलेई मेरे आये हो पिय ठीक दुपहरी की बिरियाँ l
शुभदिन शुभ नक्षत्र शुभ महूरत शुभपल छिन शुभ घरियाँ ll 1 ll
भयो है आनंद कंद मिट्यो विरह दुःख द्वंद चंदन घस अंगलेपन और पायन परियां l
'तानसेन' के प्रभु मया कीनी मों पर सुखी वेल करी हरियां ll 2 ll

साज - आज श्रीजी में गौचारण के भाव के चित्रांकन की पिछवाई धरायी है.
गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की है.

वस्त्र – आज प्रभु को चंदनी रंग की मलमल धोती एवं पटका धराया जाता हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज मध्य का (घुटने तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर चंदनी रंग के चिनमा पगा के ऊपर सिरपैंच, लूम, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
श्रीकर्ण में एक जोड़ी मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं.
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं एवं हमेल की भांति दो मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, झीनें लहरियाँ वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल के राग-रंग का एवं गोटी हक़ीक की आती हैं.

व्रज -विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण दशमी Wednesday, 10 June 2026गुलाबी मलमल की परधनी एवं श्रीमस्तक पर पाग पर गोल चंद्रिका ...
10/06/2026

व्रज -विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण दशमी
Wednesday, 10 June 2026

गुलाबी मलमल की परधनी एवं श्रीमस्तक पर पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार

श्रीजी में
प्रातः - चंदन पत्ती मंडली का मनोरथ
शाम को - चंदन पहर नाव हरि बैठे
प्रियाजी में
प्रातः - चंदन पत्ती मंडली का मनोरथ
शाम को - श्याम यमुना बीच खेवत नाव

राजभोग दर्शन –

बैठै घनस्याम सुंदर खेवत है नाव।
आज सखी मोहन संग , खेलवे को दाव।।१।।
यमुना गम्भीर नीर, अति तरंग लोले।
गोपिन प्रति कहन लागे, मीठे मृदु बोले।। २।।
पथिक हम खेवट तुम , लीजिये उतराई।
बीच धार मांझ रोकी , मिष ही मिष डुलाई ।। ३।।
डरपत हों स्याम सुंदर, राखिये पद पास।
याहि मिष मिल्यो चाहे, परमानंद दास।।। ४।।

साज – आज श्रीजी में उदयपुर के प्रसिद्द गणगौर-घाट, राजमहल, नौका-विहार, घूमर नृत्य करती गोपियों, श्री ठाकुर जी, श्री बलदेव जी एवं श्री नंद-यशोदा जी के सुन्दर चित्रांकन से सुशोभित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को गुलाबी मलमल की परदनी धरायी जाती है.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. सर्व आभरण हीरा के धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर गुलाबी मलमल की छोर वाली पाग के ऊपर सिरपैंच, मोती की घुमावदार चमकानी गोल-चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
हरे एवं कमल के पुष्पों की विविध पुष्पों की थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है वहीँ श्वेत पुष्पों एवं कमल की दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी जाती है.
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चांदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट उष्णकाल का व गोटी हकीक की आती है.

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी Monday, 08 June 2026श्वेत धोती, गाती का पटका एवं श्रीमस्तक पर श्वेत घेरा के श्रृंगा...
08/06/2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी
Monday, 08 June 2026

श्वेत धोती, गाती का पटका एवं श्रीमस्तक पर श्वेत घेरा के श्रृंगार

श्रीजी में
प्रातः - श्वेत कमल मंडली
शाम - मचक मचक झूले
प्रियाजी में
प्रातः - कली की मंडली
शाम - यमुना पुलीन हिंडोलना

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

आज ठाड़े लाल मुकुट धरे l
वदन लसत मकराकृत कुंडल रतिपति मन जु हरे ll 1 ll
अरुन अधर और चिबुक चारु बन्यो दुलरी मोहन माल गरे l
अति सुगंध और चंदन खोर किये पहोंची मोतीन की लरे ll 2 ll
कर मुरली कटि लाल काछनी किंकणी नूपुर शब्द करे l
गुन भरे ‘कृष्णदास’ प्रभु राधा निरख नेन ईत ऊत न टरे ll 3 ll

साज – आज श्रीजी में मोर के भाव की श्वेत जाली की कलात्मक पिछवाई धरायी जाती है.

वस्त्र – आज प्रभु को श्वेत मलमल धोती एवं गाती का पटका धराया जाता हैं.

श्रृंगार – आज श्रीजी को मध्य का (घुटने तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर कूल्हे पर रूपहरा घेरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मोती के मयूराकृति कुंडल धराये जाते हैं.
श्रीकंठ में कली आदि सभी माला धरायी जाती हैं. तुलसी एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर, कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं. श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चांदी के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का व गोटी हकीक की बड़ी आती है.

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Surat
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