13/04/2019
#विशेष_पोस्ट -
कल मित्रो के साथ परिचर्चा का एक विषय आपसे साझा करना चाहता हूँ , विषय था कि इस भागदौड़ में जहाँ ठीक से दैनिक कार्य करने में भी असुविधा हो जाती है फिर महाभारत , रामायण , विष्णु सहस्त्र नाम आदि जैसे ग्रन्थों को कैसे याद किया जाय उनका पाठ किया जाए क्योंकि इनका नियमित पाठ कर पाना संभव नही है --
वैदिक ऋषियों की दूरदर्शिता कह लीजिए या भविष्यदृष्टा उन्होंने इसके उपाय दे रखे है , नियमित पाठ कर पाना किसी भी ग्रंथ का संभव नही है तो उनके एक श्लोकी पाठो को जरूर एक बार पढ़ ले इससे आपको शांति और सुख दोनो मिलेगा , और जब आपके पास समय हो तो वृहद ग्रंथो को जरूर पढ़ें -
्लोकी_रामायण -
आदौ रामतपोवनादिगमनं हत्वा मृगं कांचनं
वैदेहीहरणं जटायुमरणं सुग्रीवसंभाषणम् ।
वालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनं
पश्चाद्रावणकुंभकर्णहननमेतद्धि रामायणम् ॥
॥ एकश्लोकि रामायणं सम्पूर्णम् ॥
्लोकी_महाभारत -
आदौ पाण्डवधार्तराष्ट्रजनन लाक्षागृहे दाहनं
द्यूते श्रीहरणं वने विचरणं मत्स्यालये वर्तनम् ।
लीलागोहरणं रणे विहरण सन्धिक्रियाजृम्भणं
पश्चाद भीष्मसुयोधनादिहननं चैतन्महाभारतम् ॥
्लोकी_भागवत_पुराण -
आदौ देवकि-देविगर्भ-जननं गोपीगृहे वर्धनम्
माया-पूतन-जीविताप-हरणं गोवर्धनोद्धारणम् ।
कंसच्छेदन-कौरवादि-हननं कुंतीसुतां पालनम्
एतद्भागवतं पुराणकथितं श्रीकृष्णलीलामृतम् ।।
्लोकी_विष्णु_सहस्त्रनाम -
नमोस्त्वनन्ताय सहस्त्र मूर्तये,
सहस्त्रपादाक्षि शिरोरु बाहवे।
सहस्त्र नाम्ने पुरुषायशाश्वते,
सहस्त्रकोटी युग धरिणे नम:।। ”
्लोकी_तत्वज्ञान_उपनिषद -
किं ज्योतिस्तवभानुमानहनि मे रात्रौ प्रदीपादिकं
स्यादेवं रविदीपदर्शनविधौ किं ज्योतिराख्याहि मे ।
चक्षुस्तस्य निमीलनादिसमये किं धीर्धियो दर्शने
किं तत्राहमतो भवान्परमकं ज्योतिस्तदस्मि प्रभो ॥
(श्री शंकराचार्य रचित)
।। रामनवमी और दुर्गा अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।।