15/02/2026
शुभ शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।
हम सभी जानते हैं कि शिवरात्रि पर चंद्र चरण, ऋतु परिवर्तन, उपवास, मौन और रात्रि जागरण के कारण शरीर और मन अत्यधिक ग्रहणशील हो जाते हैं। जब हम जागते हैं और सीधे बैठते हैं, तो हमारा शरीर विशेष ब्रह्मांडीय और प्राकृतिक ऊर्जा को अधिक सहजता से अवशोषित करता है।
इसीलिए जागरण और ध्यान का विधान है।
आइए भगवान शिव से संबंधित अंकों 3 और 11 के महत्व को समझें।
अंक 3 दर्शाता है:
भूतकाल-वर्तमानकाल-भविष्य (समय),
जागृत अवस्था-नींद अवस्था-स्वप्न अवस्था (मानव जीवन की अवस्थाएं),
सत्व-रजस-तमस (गुण- प्रकृति और मन के मूलभूत गुण)।
शिव इन तीनों से परे हैं - इसीलिए त्रिशूल, तीन नेत्र और तीन राख रेखाएं धारण करते हैं।
संख्या 11 निम्नलिखित का प्रतिनिधित्व करती है:
5 इंद्रियां (आंखें, कान, नाक, जीभ, त्वचा) +
5 कर्म अंग (वाणी, हाथ, पैर, उत्सर्जन, प्रजनन) + मन = 11।
यह शिव को शरीर, कर्म और विचारों के पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।
इसलिए 11 अभिषेक, 11 आहुति और 11 रुद्र।
बिल्व पत्र का महत्व:
बिल्व पत्र स्वाभाविक रूप से तीन पत्तियों वाला होता है।
यह शरीर, मन और आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है - वही तीन सिद्धांत।
बिल्व अर्पित करने का अर्थ है अपने संपूर्ण अस्तित्व को शिव को अर्पित करना।
ॐ नमः शिवाय
ये पाँच अक्षर सृष्टि के पाँच तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं:
अक्षर/तत्व
न/पृथ्वी
म/जल
शि/अग्नि
वा/वायु
या/आकाश
मंत्र की ध्वनि:
°श्वास को धीमा करती है
°वेगस तंत्रिका को उत्तेजित करती है
°तनाव हार्मोन को कम करती है
°मानसिक शांति प्रदान करती है
आइए हम सभी इस दिव्य ऊर्जा और आशीर्वाद के पात्र बनें।
नमः पार्वती-पतये हर हर महादेव 👏🏻