20/08/2026
मुश्किल वक्त में एक्सपोर्टर्स को अकेला नहीं छोड़ेगा ईपीसीएच: चेयरमैन डॉ. नीरज खन्ना
हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) की प्रशासन समिति (सीओए) की बैठक 20 अगस्त 2026 को होटल वसंत कॉन्टिनेंटल, नई दिल्ली में डॉ. नीरज खन्ना, अध्यक्ष, ईपीसीएच की अध्यक्षता में आयोजित हुई । बैठक में ईपीसीएच की प्रशासन समिति के सदस्य, ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक डॉ. राकेश कुमार; श्री अवधेश अग्रवाल, सदस्य, सीओए तथा श्री राजेश रावत, कार्यकारी निदेशक, ईपीसीएच उपस्थित रहे ।
वर्ष 2025-26 के दौरान हस्तशिल्प निर्यात 33,425.26 करोड़ रुपये (3,783.16 मिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में रुपये के संदर्भ में 0.91% की वृद्धि तथा अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में 3.40% की गिरावट दर्शाता है । वहीं, अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान अनुमानित हस्तशिल्प निर्यात 12,307.97 करोड़ रुपये (1,295.79 मिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा, जो वर्ष 2025-26 की समान अवधि की तुलना में रुपये के संदर्भ में 12.79% तथा डॉलर के संदर्भ में 1.76% की वृद्धि दर्शाता है।
समिति ने विचार व्यक्त किया कि निर्यात की वर्तमान वृद्धि दर इस क्षेत्र के लिए सरकार द्वारा निर्धारित महत्वाकांक्षी निर्यात लक्ष्यों के अनुरूप नहीं है। इसलिए हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष एवं असाधारण उपाय करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया ।
बैठक के दौरान समिति ने डॉ. नीरज खन्ना, अध्यक्ष, ईपीसीएच द्वारा सुझाए गए विभिन्न उपायों पर चर्चा की । श्री अवधेश अग्रवाल, सदस्य, प्रशासन समिति ने कहा कि हस्तशिल्प क्षेत्र में लगभग 20% की वृद्धि दर हासिल करने की आवश्यकता है तथा वर्तमान वृद्धि दर क्षेत्र की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है । उन्होंने प्रस्ताव दिया कि ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक डॉ. राकेश कुमार से समिति का मार्गदर्शन करने तथा भारत से हस्तशिल्प निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए ठोस उपाय सुझाने का अनुरोध किया जाए । इसके बाद समिति ने सर्वसम्मति से डॉ. राकेश कुमार से हस्तशिल्प क्षेत्र के महत्वाकांक्षी निर्यात लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक कार्ययोजना सुझाने का अनुरोध किया ।
डॉ. नीरज खन्ना, अध्यक्ष, ईपीसीएच ने समिति को वर्ष के दौरान, विशेष रूप से विभिन्न व्यापार मेलों में भाग लेने वाले सदस्यों को सहायता प्रदान करने की आवश्यकता से अवगत कराया। इस संदर्भ में “ईपीसीएच एग्रेसिव एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन 2026-2027” नाम से एक व्यापक योजना प्रस्तावित की गई। इस योजना का मुख्य उद्देश्य खरीदार जुटाने की गतिविधियों में तेजी लाना, नए बाजारों में विविधीकरण, अंतरराष्ट्रीय प्रचार को बढ़ाना, मौजूदा बाजारों को मजबूत करना, नए सोर्सिंग बाजारों की पहचान करना तथा सदस्य निर्यातकों के लिए अधिक व्यावसायिक अवसर सृजित करना है ।
प्रस्तावित योजना का विवरण निम्नानुसार है:
1. क्लस्टर स्तर पर सदस्यों को सहायता
- जोधपुर के बासनी केंद्र को फर्नीचर एवं हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए आधुनिक कौशल केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसे ईपीसीएच द्वारा हैंडिक्राफ्ट एंड कारपेट सेक्टर स्किल काउंसिल (एचसीएसएससी) के साथ संयुक्त रूप से एक मॉडल एवं आधुनिक स्किलिंग, इनक्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है । आगामी वर्षों में इस पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे ।
- इसी प्रकार ईपीसीएच सीएफसी, सहारनपुर को भी अपग्रेड करने के प्रयास किए जाएंगे ।
- ईपीसीएच के आगरा एक्सटेंशन सेंटर को और मजबूत किया जाएगा ।
फिरोजाबाद में उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से एक टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएगी तथा इसके लिए भूमि प्राप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
- मुरादाबाद स्थित ईपीसीएच परिसर में डब्लूजीएसएन ट्रेंड्स के साथ एक डिजाइन सेंटर स्थापित किया जाएगा। मुरादाबाद के कैश एंड कैरी सेंटर के लिए भी विशेष बजट का प्रावधान किया जाएगा ।
- टीएफसी, बोरानाडा, जोधपुर से लगी भूमि प्राप्त कर टीएफसी के विस्तार के लिए भी अनुरोध किया जाएगा ।
-दिल्ली-एनसीआर में फैशन ज्वेलरी के लिए 5 करोड़ रुपये की लागत से एक कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) स्थापित करने का प्रस्ताव है, जिसमें भूमि की लागत शामिल नहीं होगी। इसके लिए एमएसएमई तथा विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार से अनुदान का अनुरोध किया जाएगा ।
-कोलकाता में बैग क्लस्टर स्थापित करने के लिए क्लस्टर में एसपीवी के माध्यम से प्रारंभिक रूप से 1 करोड़ रुपये की सीड मनी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है ।
2. मार्केटिंग एवं सप्लाई चेन पहल
- अध्यक्ष द्वारा परिकल्पित यूरोपीय संघ एवं अमेरिका में ओवरसीज वेयरहाउस और सप्लाई चेन सुविधा को भारत सरकार के सहयोग से लागू करने के प्रयास किए जाएंगे । ईपीसीएच इस पहल को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। देशभर के ईपीसीएच सदस्यों को इस सुविधा का लाभ लेने के लिए पात्र बनाया जाएगा ।
3. भारत में आयोजित मेलों में मार्केटिंग सहायता
- आएएम्एम् इंडिया, भारत टेक्स अथवा राष्ट्रीय स्तर के अन्य प्रतिष्ठित मेलों में भाग लेने वाले ईपीसीएच सदस्यों को 250 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से सहायता प्रदान की जाएगी ।
-आईएचजीएफ दिल्ली फेयर – स्प्रिंग/ऑटम के लिए भागीदारी दर में 6,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की कमी की जाएगी। यह सहायता दोनों मेलों के लिए लागू होगी ।
-आईएचजीएफ दिल्ली फेयर के प्रदर्शकों को अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव है, जैसे परिसर में सभी बूथों, मार्ट एवं सदस्य निर्यातकों के स्टॉलों पर पानी की बोतलें आदि उपलब्ध कराना ।
4. सदस्यों के बीच आपसी जुड़ाव
-सदस्यों के बीच आपसी जुड़ाव और सहभागिता बढ़ाने के लिए फास्को, क्रिकेट एवं पिकलबॉल टूर्नामेंट के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से जुड़ी गतिविधियां भी जारी रहेंगी ।
5. डिजाइन तक पहुंच
-ईपीसीएच के सभी कार्यालयों को डब्लूजीएसएन सॉफ्टवेयर एक्सेस से सुसज्जित किया जाएगा, ताकि संबंधित सिस्टम पर नवीनतम वैश्विक डिजाइन एवं ट्रेंड्स की जानकारी उपलब्ध हो सके ।
बैठक में समिति ने यह भी निर्णय लिया कि आईएचजीएफ दिल्ली फेयर से संबंधित सभी महत्वपूर्ण कार्यों को फास्ट-ट्रैक आधार पर पूरा करने के लिए एक स्टीयरिंग कमेटी का गठन किया जाना आवश्यक है। प्रस्तावित स्टीयरिंग कमेटी का गठन निम्नानुसार है:
1. डॉ. नीरज खन्ना, अध्यक्ष, ईपीसीएच
2. श्री अवधेश अग्रवाल, अध्यक्ष, आईएचजीएफ दिल्ली फेयर
3. श्री राजेश जैन, उपाध्यक्ष, आईएचजीएफ दिल्ली फेयर
4. श्री प्रदीप मुछाला, उपाध्यक्ष, आईएचजीएफ दिल्ली फेयर
5. श्री सलमान आजम, उपाध्यक्ष, आईएचजीएफ दिल्ली फेयर
6. श्री आर. बी. लाहोटी, उपाध्यक्ष, आईएचजीएफ दिल्ली फेयर
7. श्री प्रियेश भंडारी, उपाध्यक्ष, आईएचजीएफ दिल्ली फेयर
बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि समिति भारत के हस्तशिल्प निर्यात में तेजी लाने, भारतीय हस्तनिर्मित उत्पादों की वैश्विक उपस्थिति को मजबूत करने तथा देशभर के निर्यातकों, एमएसएमई और कारीगरों के लिए अधिक व्यावसायिक अवसर सृजित करने के उद्देश्य से समन्वित एवं सक्रिय उपाय जारी रखेगी ।
https://youtu.be/j5clmq2NuiE